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हमारी हुनरशाला- हौंसलों की उड़ान

जवाहर नगर की कच्ची बस्ती, राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर में, आगरा-जयपुर बायपास के किनारे बसी एक बस्ती, जो आशियाना है लगभग 25000 लोगों के 5000 परिवारों का, जिनमे से अधिकतर लोग पिछले पच्चीस सालों से भी अधिक समय से यहाँ रह रहे हैं। कोविड-19 के प्रकोप से पहले यहाँ की औसत पारिवारिक आय लगभग 10,000/- रुपये प्रतिमाह तक हुआ करती थी। लेकिन कोविड-19 की महामारी और उस दौरान हुए लॉकडाउन ने बस्ती के लोगों के जीवन पर बहुत ही बुरा प्रभाव डाला और आजीविका के अधिकतर उपलब्ध स्रोत पूरी तरह से समाप्त हो गए थे और सभी की आर्थिक स्थिति बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित हुई थी।

इसी दौरान, काफी लंबे वक्त से इस बस्ती में साफ-सफाई, जल एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के क्षेत्र मे काम कर रही, फिनिश सोसाइटी संस्था ने आपदा की इस स्थिति में बस्ती के लोगों को सहायता और आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के लिए मुहिम शुरू की। शुरुवात मे ही यह समझ या चुका था की बस्ती की महिलायें, यूँ तो जीवन मे कई सपने सजाए हुए थी किन्तु पारिवारिक पारिवारिक दबाव और जिम्मेदारि की बेड़ियों ने उनके कदमो को आगे बढ़ने से रोक रखा था। उनके स्वप्नों को नई उड़ान देकर आजीविका के नए रास्ते खोलने के लिए संस्था द्वारा बस्ती की महिलाओ के साथ मिलकर स्वयंसहायता समूहों के सृजन की नीव डाली गई।
यहाँ बात करते हैं, समूह की मुख्य सदस्य सरजू देवी की, जो अपने आत्मविश्वास और वाक्पटुता से किसी को भी प्रभावित कर सकती है, इन्होंने अपना अधकितर जीवन संघर्षों मे गुजारा है, मूलतः आगरा की रहने वाली सरजू, जब शादी के बाद इस बस्ती में आई तो अपने परिवार को अच्छा भविष्य देने के इन्होंने भी अपने पति के साथ मिलकर परिवार की जिम्मेदारी उठाई, उनके साथ मिलकर पानी पूरी का ठेला लगाना शुरू किया, लेकिन उससे होने वाली आमदनी पर्याप्त नहीं थी जो इनको हमेशा ही निराश कर रही थी और लॉकडाउन के समय तो जो थोड़ी बहुत आमंदनी थी वो भी बंद हो गई। इसी दौरान ये फिनिश सोसाइटी द्वरा शुरू की गई मूहिम से जुड़ी और इन्होंने अपने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अचार, पापड़, बड़ी और काम्पोस्ट खाद बनाकर मेले और बाजार मे बेचना शुरू कर दिया, और यहाँ से सरजू ने एक ऐसे सफर की शुरुवात की, जो न सिर्फ इनकी, बल्कि जवाहर बस्ती के हर परिवार और हर महिला का जीवन बदलने वाला था ।
सरजू ने बहुत जल्दी समझ लिया की एक सफल व्यवसाय खड़ा करने के लिए जरूरी है, की हर क्षेत्र और हर हुनर के लोगों को साथ जोड़ा जाए इसके लिए सबसे पहले उन्होंने मीना देवी और गौरा को साथ जोड़ा जो की सिलाई के कार्यों मे माहिर थी।
मीना और गौरा का जीवन भी बहुत ही संघर्ष पूर्ण रहा था, मीना जो की इस समूह की सबसे उम्रदराज सदस्य है, इन्होंने अपनी सारी उम्र अपने परिवार के लिए अपने सपनों का बलिदान दिया और अब हमारी हुनरशाला के माध्यम से अपने और सभी सदस्यों के सपने पूरे करने मे मदद करने वाली थी, गौरा जिनका एक स्वप्न थे की वो सिलाई कढ़ाई सीख कर अपने परिवार का जीवकोपार्जन कर सके,
फिर सीता जो एक ऐसी जिद्दी महिला है की अगर वो कुछ ठान ले तो उसे पूरा करने मे कोई कोर कसर नहीं छोड़ती और फिर जुड़ी ढोली, जो अपनी सारी मुश्किलों को अपनी मुस्कान के पीछे छुपा देती है और उसकी यही मुस्कान समूह के सभी सदस्यों को ऊर्जा से भर देती है। धीरे- धीरे बस्ती की कई महिलाओ ने भी अपना समूह बनाया और या फिर सरजू के समूह से जुड़ती गई।
जहाँ एक और उन सबके सपने आसमान की ऊंचाइयों तक पहुँचने के थे और लेकिन सामान्य जानकारियों का अभाव उनके सपनों की उड़ान को रोक रहा था। सबके मन मे कुछ करने का उत्साह बहुत था लेकिन, क्या करना है कैसे करना इस जानकारी का अभाव भी था। कोई अनुभव नहीं, कोई प्रशिक्षण नहीं बाजार क्या होता है, मार्केटिंग और सेल क्या है, यह भी नहीं पता।
इन्ही सब समस्याओ की पहचान और निराकरण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूसी फाउंडेशन की मदद से फिनिश सोसाइटी ने उठाई और उनकी क्षमताओ को पहचानने और उनके कौशल-विकास के लिए प्रशिक्षण की शुरुवात की।
एक बार जब इन सबको उद्यमी बनने का प्रशिक्षण मिल गया तो इन सभी महिलाओ ने एकजुट होकर 100,000 रुपये इकट्ठे किए और शुरू की अपनी खुद की कंपनी “हमारी हुनरशाला”।

आज “हमारी हुनरशाला” के बनाए मसालों, आचारों और विभिन्न प्रकार की पोशाकों के साथ बाजार मे अपनी पहचान बनाने मे प्रयासरत है।


आज “हमारी हुनरशाला” मे 20 से अधिक महिलाये जुड़कर इस कंपनी को चला रही है, पीडब्ल्यूसी फाउंडडेशन और फिनिश सोसाइटी के द्वारा दिए गए प्रशिक्षण और इन महिलाओ के आत्मविश्वास का ही नतीजा है, की “हमारी हुनरशाला” के सदस्य एक परिपक्व उद्यमी की भांति अपने उत्पाद, गुणवत्ता और मूल्य निर्धारण पर चर्चा करने लिए हमेशा तैयार रहते है।
आज “हमारी हुनरशाला” की टीम अपने द्वारा बनाए गए मसालों, अचार और विभिन्न प्रकार की पोशाकों को बेचने के संसाधन जुटाने मे व्यस्त है, और अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए नए सहयोगीयों कर साथ जुड़ रहे है, साथ ही सिर्फ अचार और मसालों के साथ शुरू हुए सफर मे आज मसालों की कई नई शृंखलाएं, स्त्री और पुरुषों के लिए कपड़े, भगवान कान्हा जी के लिए वस्त्र,वंदनवार, मेजपोश आदि उत्पाद भी जुड़ चुके हैं।
“हमारी हुनरशाला” का सपना है की एक दिन इनके उत्पाद न सिर्फ राजस्थान बल्कि देश के हर घर में जाने जाए और प्रयोग किए जाएंगे।

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